राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (वित्तीय नियम खंड) ने सार्वजनिक खरीद के नियमों में एक महत्वपूर्ण संशोधन जारी किया है। राज्यपाल के आदेश के तहत जारी इस अधिसूचना में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को आधिकारिक सूची में जोड़ा गया है। यह संशोधन राज्य में डेयरी विकास परियोजनाओं और संबंधित कार्यों के लिए परामर्श सेवाओं के अधिग्रहण को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
कानूनी प्रावधान और संशोधन का आधार
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, यह कदम राजस्थान पारदर्शिता सार्वजनिक खरीद अधिनियम, 2012 (Act No. 21 of 2012) की धारा 6 की उप-धारा (2) के तहत प्रद शक्तियों और राजस्थान पारदर्शिता सार्वजनिक खरीद नियम, 2013 के नियम 32 के अंतर्गत उठाया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की सामाजिक-आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाने, उनके संसाधनों तथा विशेषज्ञता का सही उपयोग करने और अलग-अलग बोलियां आमंत्रित करने में लगने वाले समय, धन व श्रम की बचत के लिए यह संशोधन आवश्यक है।
नई सूची और कार्यक्षेत्र
वर्ष 2013 की मूल अधिसूचना की तालिका में क्रम संख्या 66 के बाद अब क्रम संख्या 67 को जोड़ दिया गया है। इसके तहत निम्नलिखित सेवाओं को शामिल किया गया है:
- डेयरी विकास और अन्य संबंधित परियोजनाओं के लिए सर्वेक्षण, डीपीआर (DPR) और डिजाइनिंग सहित परामर्श सेवाएं।
- डेयरी विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने सहित परियोजना या कार्यक्रम तैयार करने और क्रियान्वयन के वास्ते डिजाइन, योजना एवं निष्पादन के लिए एंड-टू-एंड आधार पर परामर्श सेवाएं।
शुल्क संरचना और वित्तीय शर्तें
अधिसूचना के अनुसार, इन सेवाओं के लिए शुल्क व्यवस्था को भी स्पष्ट किया गया है। परामर्श शुल्क मील के पत्थर (milestones) और उपलब्धियों से जुड़ा होगा, जबकि सफलता शुल्क (success fee) परियोजना या कार्यक्रम के पूर्ण होने पर आधारित होगा। इस पूरी प्रक्रिया का संचालन वित्त विभाग के निर्देशानुसार किया जाएगा और इस संबंध में संयुक्त सचिव महेंद्र मोहन द्वारा आदेश जारी किए गए हैं।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Rajasthan Finance Department की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।
