राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 (RIPS 2024) की प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देशों में संशोधन करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश लोक हित में जारी किया गया है, जिसके तहत कई नए उप-खंड और प्रावधान जोड़े गए हैं।
वस्त्र इकाइयों के लिए पेरोल सब्सिडी और अन्य मानदंड
संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, पात्र वस्त्र इकाइयों (Textile Units) के लिए पेरोल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। यह सब्सिडी केवल उन पात्र उद्यमों के लिए उपलब्ध होगी जो योजना के तहत वस्त्र क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इसके लिए रोजगार सृजन से जुड़ी कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें स्थायी पेरोल पर काम करने वाले, ईपीएफ या ईएसआई में पंजीकृत और राजस्थान के मूल निवासी कर्मचारी शामिल हैं।
एमएसएमई और परिसमापन संपत्तियों से जुड़े प्रावधान
नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई एमएसएमई उद्यम भारत सरकार की परिभाषा के अनुसार अब एमएसएमई नहीं रहता है, तब भी उसे नीति के तहत स्वीकृत शेष अवधि के लिए मूल रूप से अनुमोदित एमएसएमई-श्रेणी के लाभ मिलते रहेंगे। इसके अलावा, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत परिसमापन या समाधान कार्यवाही में अधिगृहीत संपत्तियों के संबंध में भी पात्रता और फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट (EFCI) की गणना को लेकर नई शर्तें जोड़ी गई हैं।
अन्य नीतियां और प्रशासनिक दिशा-निर्देश
आदेश के अनुसार, यदि राजस्थान सरकार की कोई अन्य नीति RIPS के तहत किसी प्रोत्साहन का संदर्भ देती है, तो उसे RIPS के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही संचालित और संसाधित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष और इंसेंटिव वर्ष के संरेखण न होने पर वार्षिक सीमा तय करने के लिए आनुपातिक (pro-rata) आधार पर गणना का नियम भी जोड़ा गया है।
प्राथमिक स्रोत: यह स्वतंत्र समाचार-सार Rajasthan Finance Department की आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। पूरी जानकारी के लिए मूल दस्तावेज पढ़ें।



